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दुल्हन ससुराल पहुंच 20 मिनट में तोड़ी शादी

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  सुहागरात से पहले दुल्हन मायके लौटीः देवरिया में ससुराल पहुंचकर 20 मिनट में शादी तोड़ी; दूल्हा बोला- इज्जत मिट्टी में मिल गई देवरिया में एक नई-नवेली दुल्हन ने ससुराल में 20 मिनट रहने के बाद पति के साथ रहने से इन्कार कर दिया। दुल्हन ने अपना यह फैसला घर के आंगन में सुनाया, उस वक्त वहां रिश्तेदार और परिवार की तमाम महिलाएं मौजूद थीं। महिलाएं भौचक रह गईं। पहले तो लोगों को उसकी बातों पर भरोसा नहीं हुआ। सवाल पूछा- क्या हुआ? फिर दुल्हन ने अपनी बात दोहराई। कहने लगी कि उसे पति के साथ नहीं रहना है। सुसराल वालों ने लड़की को खूब मनाया। उसके इस फैसले की वजह पूछी। लेकिन दुल्हन अपनी जिद पर अड़ी रही। लड़के वालों ने दुल्हन के घरवालों को बुलाया। गांव में दोनों परिवारों के बीच पांच घटे पंचायत चली। सभी समझाते रहे, लेकिन लड़की नहीं मानी। पंचायत में ही लिखा-पढ़ी के बाद दोनों ने अलग रहने के फैसला किया और एक पेपर पर साइन कर संबंध खत्म कर लिए। दूल्हे ने दहेज में मिले सभी सामान वापस कर दिए। इसके बाद दुल्हन सुहागरात से पहले ही मायके लौट गई। दूल्हे ने कहा- पूरे परिवार की इज्जत मिट्टी में मिल गई। 6 महीने पहले ...

इस तरीके से आप एक महीने में 5 किलो वजन कम कर सकते हैं।

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• कम कैलोरी वाले व्यंजन जैसे सूप,सलाद,सब्जी पनीर इत्यादि लें। • शकर कंद की चाट, बिना घी की दाल, बिना घी की चपाती लें। • चाय में चीनी के बजाय शहद लें। • इडली में अंकुरित मूंग मिलाकर खाने से ये पौष्टिक और हेल्दी होगा। • तले भोजन के बजाय उबला भोजन, बिना मलाई का दूध-दही लें। • सब्जी की करी के लिए टमाटर और गाजर का इस्तेमाल करे और मीठे में सेब और अनानास का प्रयोग करें। • पालक का प्रयोग नूडल्स,सूप या सलाद में करें ,पालक के पत्तों से सैंडवीच भी बनायीं जा सकती हैं। • हरे पपीते की सब्जी बनाये या पका हुआ पपीता खाएं। • खाने में पनीर और सोयाबीन को प्रमुखता से शामिल करें। • प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन का सेवन करें। • बटर की जगह फ्रेश हर्बल स्प्रेड टोस्ट का प्रयोग करे। • इन सबके अलावा आप अंकुरित चने, मोंठ, सूप, जूस, सलाद, हरी सब्जियां इत्यादि को अपने भोजन में शामिल कर वजन कम कर सकते हैं। • खाना कम मात्रा में खाएं और सही समय पर खायें। इससे आपकी पाचन क्रिया बराबर चलती रहेगी और कैलोरी का बराबर उपयोग होता रहेगा। • वजन कम करने के लिए खाने के अलावा पानी पीना और व्यायाम करना भी जरूरी है। जिससे आप फिट, हेल्द...

सूर्य देव की रविवार व्रत कथा

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  रविवार व्रत कथा.......                 बहुत समय पहले की बात है, एक बुढ़िया हर रविवार प्रात:काल उठकर नहा धोकर अपने घर आंगन को गाय के गोबर से लीपती फिर सूर्य देव की पूजा करती और उन्हें भोग लगाकर ही स्वयं भोजन करती। बुढ़िया के पास गाय नहीं इसलिये पड़ोसियों के यहां से गाय का गोबर उसे लाना पड़ता। इस प्रकार सूर्य देव की नियमित रूप से आराधना करने पर बुढ़िया का घर धन धान्य से संपन्न रहने लगा। बुढ़िया के दिन फिरते देख पड़ोसन जलने लगी। अब वो क्या करती कि रविवार के दिन उसने अपनी गाय को अंदर बांधना शुरु कर दिया जिससे बुढ़िया को गोबर नहीं मिला और घर की लिपाई भी नहीं हुई। लिपाई न होने के कारण बुढ़िया ने कुछ नहीं खाया।                🌞🌞🌞🌞 इस प्रकार वह निराहार रही और भूखी ही सो गई। उसे सपने में सूर्य देव ने दर्शन दिये और पूछा कि आज आपने मुझे भोग क्यों नहीं लगाया। बुढ़िया ने बताया कि उसके पास गाय नहीं है और वह पड़ोसन की गाय का गोबर लाकर लिपाई करती थी। पड़ोसन ने अपनी गाय अंदर बांध जिस कारण वह घर की लिपाई नहीं कर सक...

प्रदोष व्रत कथा, प्रदोष व्रत करने वालों को ये कथा जरूर पढ़नी चाहिए

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  प्रदोष व्रत कथा...   स्कंद पुराण के अनुसार प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन संध्याकाल के समय को "प्रदोष" कहा जाता है और इस दिन शिवजी को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत की कथा निम्न है:          🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹   स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी तो उसे नदी किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया जो विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर उसका राज्य हड़प लिया था। उसकी माता की मृत्यु भी अकाल हुई थी। ब्राह्मणी ने उस बालक को अपना लिया और उसका पालन-पोषण किया।           🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों के साथ देवयोग से देव मंदिर गई। वहां उनकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को बताया कि जो बालक उन्हें मिला है वह विदर्भदेश के राजा का पुत्र है जो युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता को ग्राह ने अपना भ...

एकादशी का व्रत करने वालों को पता होनी चाहिए ।ये महत्वपूर्ण बातें ।

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एकादशी व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष को दशमी वाले दिन मांस, प्याज तथा मसूर की दाल आदि का सेवन कदापि नहीं करना चाहिए। एकादशी वाले दिन प्रातः पेड़ से तोड़ी हुई लकड़ी की दातुन नहीं करनी चाहिए। इसके स्थान पर नीबू, जामुन या आम के पत्तों को चबाकर मुख शुद्ध कर लेना चाहिए। उंगली से कंठ शुद्ध करना चाहिए। इस दिन ध्यान रखें वृक्ष से पत्ता तोड़ना वर्जित है, अतः स्वयं गिरे हुए पत्तो का ही उपयोग करें। पत्ते उपलब्ध न होने पर बारह बार शुद्ध जल से कुल्ले कर मुख शुद्धि करनी चाहिए। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर, ekadashi -पाठ करना चाहिए या पुरोहितादि से सुनना चाहिए। भगवान के सम्मुख इस प्रकार प्रण करना चाहिए- आज मैं दुराचारी, चोर व पाखंडी व्यक्ति से बात-व्यवहार नहीं करूंगा। किसी से कड़वी बात कर उसका दिल नहीं दुखाऊंगा। गाय, ब्राह्मण आदि को फलाहार व अन्नादि देकर प्रसन्न करूंगा। रात्रि जागरण कर कीर्तन करूंगा। ॐ नमो  भगवते वासुदेवाय इस द्वादश अक्षर मंत्र का जाप करूंगा। राम, कृष्ण इत्यादि विष्णु सहस्रनाम को कंठ का आभूषण बनाऊंगा। इस प्रकार प्रण करने के बाद श्रीहरि भगवान विष्णु का स्मरण कर प्रार्थना करनी चाहिए- हे...

अगर इस विधि से पहनेंगे पांच मुखी रुद्राक्ष तो फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे

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पांचमुखी रुद्राक्ष के फायदे 1.इस व्यक्ति की असामयिक मृत्यु नहीं होती है 2.यह लाइन वाले को निडर बनाता है। 3.यह ऊर्जा के तरल प्रवाह के लिए शरीर पर सभी चक्रों को सक्रिय करने में मदद करता है। 4.यह बृहस्पति के प्रभावशाली प्रभाव को कम करने में मदद करता है। 5.यह अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है। 6. यह स्टेकर तनाव से मुक्ति दिलाता है और मन को शांत रखता है। 7.यह शरीर में रक्त के परिसंचरण में सुधार करता है। 10.इन्सिनोता को दूर करने में मदद करता है। 11.यह श्लोक वाले की आत्मा को जागृत करता है और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देता है। 12.यह व्यक्ति को बुद्धि बनाता है और व्यक्तित्व से नीरसता को दूर करता है। 13.यह विद्वान, वैज्ञानिक, ईसाई और ऐसे संग्रहालय से संबंधित लोगों को प्रदर्शित करता है। पंचमुखी रुद्राक्ष की विधि इस रुद्राक्ष की व्याख्या के लिए गुरुवार का दिन शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष की कहानियों वाले को मांस-मदिरा का त्याग करना चाहिए। रुद्राक्ष के अलावा यदि आप अपनी कमाई से खरीदारी में बाधा डालते हैं तो यह आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालता है अन्यथा इसकी संपत्ति से आप प्रतिस्पर्धा रह सकते हैं...

बाल दिवस का इतिहास, आखिर क्यों मनाया जाता है बाल दिवस?

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  बाल दिवस  👫 भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन, 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे और बच्चे उन्हें चाचा नेहरू कह कर बुलाते थे। बाल दिवस बच्चों को समर्पित भारत का एक राष्ट्रीय त्योहार है   14  नवंबर की ऐतिहासिक घटनाएँ। 💥ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1681 में बंगाल के लिए अलग रियासत बनने की घोषणा की। 💥 अमेरिका में 1914 में पहली मॉक कॉमिक फीचर फिल्म "टिलिस पंचर्ड रोमांस" रिलीज़ हुई। 💥ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) ने 1922 में ब्रिटेन में रेडियो सेवा की शुरुआत की। वह ब्रिटेन में रेडियो प्रसारण करने वाली पहली संस्था बनी। 💥 ब्रिटेन की राजकुमारी ऐन ने 1973 में आम नागरिक से शादी की। इससे पहले राजघराने में ऐसा नहीं हुआ था। 💥चीन के राष्ट्रपति गामा जेमिन ने 2002 में अपने पद से इस्तिफ़ा दिया। 💥 भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों ने 2006 में नई दिल्ली में उग्र विरोधी मैकेनिज्म पर सहमति जताई। 💥डेनिश के प्रधानमंत्री आंद्रे फाग रासमुस्सेन ने 2007 में लगातार तीसरी ब...